नीले बादलों सा ही था उनका खाया
जो लब्ज़ स्याही ने लिखे नहीं,
उनका भी रंग शायद नीला ही था
वह लम्हे जो ख्याल तक भी पहुचें नहीं
उनका भी रंग नीला ही होगा…
शायद!