एक लम्हा
जब पास थे वह हमारे.
जब उनकी मुस्कान को देखकर
अपनी मुस्कराहट को दबाया था हमने.
जब उनकी कागज़ आवाज़ को सुनकर
अपने शब्दों को बदला था हमने.
जब उनके चलें जाने पर
अपने होने का एहसास खोया था हमने.
एक लम्हा जिया था उस दिन शायद…
जब साथ थे वह हमारे.
जब उनकी सोच की उड़ान देख
ज़िंदा हुए थे कुछ ख्वाब हमारे.
जब उनके तनहा पल को महसूस कर
बेताबियाँ जाएगी थी दिल में हमारे.
जब उनके नीले रंग का आकाश ओढ़कर
सुखा हरा हुआ था भीतर हमारे.
एक लम्हा जिया था उस दिन शायद…
जब एक बार फिर
आग से अलग होकर
राख की तरह जुड़ा हुए थे वह हमारे.




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